धर्मांतरण के दबाव का आरोप: बेरोजगार युवक ने स्कूल प्रिंसिपल और पत्नी पर दर्ज करवाई एफआईआर, छत्तीसगढ़ में उठे गंभीर सवाल

बिलासपुर, 11 मई 2025।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राज्य में धर्मांतरण, धार्मिक स्वतंत्रता और शिक्षा तंत्र की निष्पक्षता को ले कर गंभीर बहस छेड़ दी है। जिले के चकरभाठा थाने में एक बेरोजगार युवक मंयक पाण्डेय ने डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, कुम्हारी मरवाही की प्रिंसिपल केरोलाईन मैरी और अपनी पत्नी रंजना पाण्डेय के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 299 और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज करवाई है।
आरोप है कि मंयक को ईसाई धर्म अपनाने के लिए न केवल मानसिक दबाव दिया गया, बल्कि 50,000 रुपये और नौकरी का लालच भी दिया गया।
मंयक पाण्डेय, जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद बेरोजगार है, ने अपनी शिकायत में बताया कि उसकी शादी 10 फरवरी 2019 को मध्य प्रदेश के अनुपपुर जिले की रंजना पाण्डेय से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। विवाह के बाद से दोनों के संबंधों में तनाव रहा और फिलहाल कोतमा न्यायालय में पारिवारिक विवाद का मामला लंबित है।
मंयक का कहना है कि 10 मार्च 2025 को अदालत में पेशी के दौरान जब वह अपनी पत्नी से समझौते की बात करने गया, तो उसकी पत्नी ने बताया कि डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल केरोलाईन मैरी ने उसका जबरन “बेप्टिस्मा” कराया है। उसने यह भी दावा किया कि केरोलाईन मैरी मंयक पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव बना रही हैं और इसके बदले पैसे और नौकरी का लालच दे रही हैं।


धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन या पारिवारिक कलह?
मंयक ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी नौकरी बचाने के दबाव में ईसाई धर्म अपना चुकी है और अब वह उस पर भी वैसा ही करने का दबाव बना रही है। यह घटना न केवल उसके धार्मिक विश्वासों को ठेस पहुंचाती है, बल्कि मानसिक रूप से भी उसे प्रताड़ित कर रही है।
थाना चकरभाठा ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और धारा 3(5) के तहत एफआईआर क्रमांक 003/25 दर्ज की है।
बड़े सवाल जो इस मामले से उठते हैं:
क्या एक स्कूल प्रिंसिपल जैसे संवेदनशील पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा धर्मांतरण के लिए आर्थिक प्रलोभन देना न्यायोचित है?
क्या यह सिर्फ एक वैवाहिक विवाद है या इसके पीछे किसी संगठित धर्मांतरण गिरोह का हाथ है?
क्या प्रशासन और शिक्षा विभाग इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर पाएगा?
समाज के लिए चेतावनी या अवसर?
यह मामला अब केवल एक व्यक्ति का नहीं रह गया है। यह हमारे समाज में धार्मिक स्वतंत्रता, नैतिकता और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है। प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे इस मामले की गहराई से जांच कर सच्चाई को सामने लाएं और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करें



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