कटघोरा में दुर्लभ एशियन पाम सिवेट का सफल रेस्क्यू: वन विभाग और नोवा संस्था की संयुक्त कार्रवाई

कटघोरा में दुर्लभ एशियन पाम सिवेट का सफल रेस्क्यू: वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की संयुक्त पहल



कोरबा, छत्तीसगढ़ | 15 मई 2025
कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल अंतर्गत मुंडाली गांव में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। यहां वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की संयुक्त टीम ने एक दुर्लभ प्रजाति की एशियन पाम सिवेट (Asian Palm Civet) को उसके बच्चों सहित सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।

मादा सिवेट अपने बच्चों के साथ एक ग्रामीण के घर में रह रही थी। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। टीम ने पूरी मानवीय संवेदनशीलता और सतर्कता के साथ सभी को पकड़कर पास के सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया।

DFO कुमार निशांत झा ने बताया कि ग्रामीणों ने जब इस अनोखे जीव को घर में देखा तो तुरंत सूचना दी। “रेस्क्यू के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि मादा सिवेट और उसके बच्चों को कोई नुकसान न पहुंचे,” उन्होंने बताया।

ग्रामीणों में कौतूहल और उत्सुकता
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस तरह का जीव उन्होंने पहली बार देखा। जैसे ही लोगों की नजर पड़ी, गांव में हड़कंप मच गया और आसपास के गांवों से भी लोग इसे देखने पहुंच गए। सिवेट को देखने के बाद ग्रामीणों ने शोर मचाया और वन विभाग को इसकी सूचना दी।


मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की मिसाल
यह रेस्क्यू ऑपरेशन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि यदि प्रशासन, विशेषज्ञ संस्थाएं और स्थानीय लोग मिलकर काम करें, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष को टाला जा सकता है। साथ ही, जैव विविधता संरक्षण के लिए यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

एशियन पाम सिवेट एक निशाचर और दुर्लभ प्रजाति है, जो आमतौर पर घने जंगलों में पाई जाती है। यह कीट नियंत्रण और जैव विविधता संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह घटना बताती है कि सजग नागरिकता और समन्वय से न केवल जीवन सुरक्षित होते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

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